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भागलपुर में विक्रमशिला सेतु की दीवार क्षतिग्रस्त, पिलर के पास दरार से बढ़ी चिंता, जांच के आदेश

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भागलपुर। गंगा नदी पर बने पूर्वी बिहार के सबसे महत्वपूर्ण पुलों में शुमार विक्रमशिला सेतु को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आई है। पुल के एक पिलर के पास बनी सुरक्षा दीवार के क्षतिग्रस्त होकर टूट जाने से इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों ने स्थानीय लोगों, यात्रियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यह पुल न केवल भागलपुर बल्कि पूरे कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माना जाता है, ऐसे में इसकी स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल बेहद गंभीर हैं।
बताया जा रहा है कि हाल ही में पुल के एक हिस्से में पिलर के पास बनी सुरक्षा संरचना अचानक क्षतिग्रस्त हो गई। दीवार के टूटने के बाद वहां से गुजरने वाले लोगों में डर का माहौल बन गया। कई राहगीरों ने इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह स्थिति आगे चलकर बड़े खतरे में बदल सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। भागलपुर के जिलाधिकारी नवेल किशोर चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा गया है। इस टीम में कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएं।
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पुल की पूरी संरचना का निरीक्षण किया जाए, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।
इधर, पुल निर्माण निगम की ओर से भी इस मामले पर सफाई दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जो दीवार टूटी है, वह मुख्य ढांचे का हिस्सा नहीं, बल्कि एक “फॉल्स वॉल” यानी अस्थायी संरचना थी। उनका दावा है कि इस तरह की दीवारें मूल संरचना की मजबूती को प्रभावित नहीं करतीं और इसे जल्द ही हटाकर आवश्यक मरम्मत कार्य किया जाएगा।
हालांकि, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि भले ही यह दीवार मुख्य संरचना का हिस्सा न हो, लेकिन इसका टूटना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं निर्माण और रखरखाव में कमी रही है। यदि समय रहते व्यापक जांच नहीं की गई, तो यह पुल की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
जानकारी के अनुसार, इस पुल की आखिरी बड़ी तकनीकी मरम्मत वर्ष 2016 के आसपास की गई थी। इसके बाद से नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। हाल के दिनों में पुल की रंगाई-पुताई जरूर की गई, जिससे वह देखने में नया लगे, लेकिन अंदरूनी संरचना की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े पुल के लिए नियमित तकनीकी ऑडिट और संरचनात्मक जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि छोटे-छोटे दोष समय रहते ठीक किए जा सकें।
करीब 25 साल पहले बने इस पुल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था। लगभग 4.7 किलोमीटर लंबा यह सेतु भागलपुर को कोसी और सीमांचल के कई जिलों से जोड़ता है। हर दिन हजारों-लाखों लोग इस पुल का इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए न केवल यातायात सुगम होता है, बल्कि व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियां भी इसी पर निर्भर करती हैं।
यह पुल अंग क्षेत्र के लोगों के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, व्यापार करने वाले लोग, मरीज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए यात्रा करने वाले लोग—सभी के लिए यह एक अहम संपर्क साधन है। ऐसे में इसकी सुरक्षा को लेकर जरा सी भी लापरवाही बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर पुल की सही तरीके से जांच और मरम्मत की जाती, तो शायद इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे पुल की विस्तृत जांच कराई जाए और जहां भी कमजोरी हो, उसे तुरंत दुरुस्त किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुल जैसे महत्वपूर्ण ढांचों की निगरानी केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे प्राथमिकता के साथ किया जाना चाहिए। छोटी-छोटी दरारें या कमजोरियां समय के साथ बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं। इसलिए नियमित निरीक्षण और वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव बेहद जरूरी है।
फिलहाल प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नुकसान कितना गंभीर है और क्या तत्काल मरम्मत की जरूरत है। तब तक लोगों में चिंता बनी हुई है और सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।
कुल मिलाकर विक्रमशिला सेतु की यह घटना एक चेतावनी के रूप में सामने आई है। यह केवल एक दीवार के टूटने का मामला नहीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं पर सवाल है, जिनके भरोसे लाखों लोग रोज सफर करते हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकती है।

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